📌 SUMMARY /
- भारत सरकार ने जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु होमस्टे मालिकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की।
- कार्यशाला में गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिससे सामुदायिक आधारित पर्यटन को मजबूती मिली।
- पीएम जनमन योजना के माध्यम से बुनियादी ढांचे जैसे आवास, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा को सुदृढ़ किया जा रहा है।
- DAJGUA योजना कौशल विकास, आजीविका सृजन और सांस्कृतिक संरक्षण पर केंद्रित है।
- सरकार का लक्ष्य जनजातीय होमस्टे को आर्थिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करना है।
20 Mar 2026, New Delhi
भारत सरकार जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए अब सिर्फ योजनाएं बना ही नहीं रही, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए ठोस कदम भी उठा रही है। इसी दिशा में जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) ने भारत पर्यटन विकास निगम (ITDC) के सहयोग से नई दिल्ली स्थित होटल सम्राट में जनजातीय होमस्टे मालिकों के लिए एक क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के जनजातीय होमस्टे मालिकों और उनकी टीमों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य सामुदायिक आधारित और सतत पर्यटन को बढ़ावा देना था, ताकि आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा किए जा सकें।
कार्यक्रम का नेतृत्व मंत्रालय के अपर सचिव मनीष ठाकुर ने किया। उन्होंने बताया कि सरकार की कई प्रमुख योजनाएं जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
इनमें पीएम जनमन (PM-JANMAN) एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए आवास, सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यह बुनियादी ढांचा पर्यटन विकास की नींव तैयार करता है।
वहीं, DAJGUA (अनुसूचित जनजातियों के लिए विकास कार्य योजना) एक अभिसरण आधारित ढांचा है, जो कौशल विकास, आजीविका सृजन और सांस्कृतिक संरक्षण पर केंद्रित है। इसके माध्यम से जनजातीय समुदायों को सतत और सम्मानजनक आर्थिक प्रगति के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। कार्यशाला में डिजिटल साक्षरता, उद्यमशीलता कौशल और सरकारी योजनाओं तक पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इससे होमस्टे मालिक बेहतर प्रबंधन, मार्केटिंग और पर्यटकों को आकर्षित करने में सक्षम होंगे।
मनीष ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय होमस्टे मालिक केवल व्यवसायी नहीं हैं, बल्कि वे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतिनिधि भी हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि विकास के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान भी सुरक्षित रहे।
सरकार का यह प्रयास समावेशी पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय रोजगार सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण और अंतिम छोर तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पर्यटन को विकास योजनाओं के साथ जोड़कर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों को भी आर्थिक विकास का समान लाभ मिले।